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दरूद-ए-इब्राहीमी

पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) पर भेजा जाने वाला सबसे महान और सार्वभौमिक रूप से पढ़ा जाने वाला दरूद, जिसे स्वयं पैगंबर ने सिखाया था।

अरबी पाठ

दरूद का पाठ

اَللّٰهُمَّ صَلِّ عَلٰى مُحَمَّدٍ وَعَلٰى آلِ مُحَمَّدٍ،

كَمَا صَلَّيْتَ عَلٰى إِبْرَاهِيمَ وَعَلٰى آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ.

اَللّٰهُمَّ بَارِكْ عَلٰى مُحَمَّدٍ وَعَلٰى آلِ مُحَمَّدٍ،

كَمَا بَارَكْتَ عَلٰى إِبْرَاهِيمَ وَعَلٰى آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ.

हिन्दी

अनुवाद

ऐ अल्लाह! रहमत नाज़िल फरमा मुहम्मद (सल्ल.) और उनकी आल (परिवार) पर, जिस तरह तूने रहमत नाज़िल फरमाई इब्राहीम (अलैह.) और उनकी आल पर, बेशक तू तारीफ के लायक और बुज़ुर्गी वाला है।

ऐ अल्लाह! बरकत नाज़िल फरमा मुहम्मद (सल्ल.) और उनकी आल पर, जिस तरह तूने बरकत नाज़िल फरमाई इब्राहीम (अलैह.) और उनकी आल पर, बेशक तू तारीफ के लायक और बुज़ुर्गी वाला है।

संक्षिप्त विवरण

दरूद-ए-इब्राहीमी पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) पर दरूद भेजने का सबसे प्रामाणिक और प्रमुख रूप है। बाद के विद्वानों द्वारा संकलित अन्य दरूदों के विपरीत, दरूद-ए-इब्राहीमी के शब्द स्वयं पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) ने अपने साथियों को सिखाए थे। यह दैनिक प्रार्थना (नमाज़) का एक अभिन्न अंग है, जिसे अंतिम बैठक (तशह्हुद) के दौरान पढ़ा जाता है।

महत्व और ईश्वरीय संदर्भ

अल्लाह का आदेश (कुरान)

إِنَّ اللّٰهَ وَمَلَائِكَتَهُ يُصَلُّونَ عَلٰى النَّبِيِّ ۚ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا صَلُّوا عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا تَسْلِيمًا

"बेशक अल्लाह और उसके फ़रिश्ते नबी पर दरूद भेजते हैं। ऐ ईमान वालो! तुम भी उन पर दरूद भेजो और खूब सलाम भेजा करो।"

प्रामाणिक हदीस संदर्भ

अब्दुर-रहमान बिन अबी लैला ने कहा: काब बिन उजरा मुझसे मिले और कहा, "क्या मैं तुम्हें वह उपहार न दूं जो मुझे पैगंबर (ﷺ) से मिला है?" मैंने कहा, "हाँ, ज़रूर दें।" हमने पूछा, "ऐ अल्लाह के रसूल (ﷺ)! हम आपको सलाम करना तो जानते हैं, लेकिन आप पर दरूद कैसे भेजें?"

पैगंबर (ﷺ) ने कहा, "कहो: ऐ अल्लाह! रहमत नाज़िल फरमा मुहम्मद (ﷺ) और उनकी आल पर... (दरूद-ए-इब्राहीमी)।"